Aarti Sangrah

Aarti Sangrah

आरती बजे छम छम छम

बाजे छम छम छम छमा छम बाजे घुँघरू बाजे घुँघरू०

हाथों में दीपक लेकर आरती करूँ

बाजे छम छम०

 

प्रभु को उठाया हाथी पे बैठाया २

पांडुक बन अभिषेक कराया, इसलिए प्रभु तेरी आरती करूँ

दीपक ज्योति से आरती करूँ २

वीर प्रभुजी की मूरत निहारूँ २

ध्यान लगन चरणों में धरूँ

चरणों में धरूँ० हाथों में दीपक लेकर०

 

हम सब प्रभु के गुण को गाएँ

प्रभुजी के चरणों में शीश झुकाएँ० इसलिए प्रभु तेरी आरती करूँ

प्रभु तुम बिन मोहे कोई ना संभाले

प्रभु तुम बिन कोई ना पारे लगावे

मेरी यही चाह और कुछ ना कहूँ० हाथों में दीपक लेकर आरती करूँ