Aarti Sangrah
बाहुबली जी आरती
जयति जय जय गोम्मटेश्वर,
जयति जय बाहुबली ।
जयति जय भरताधिपति,
विजयी अनुपम भुजबली ।
श्री आदिनाथ युगादि
ब्रह्मा त्रिजगपति विख्यात हैं ।
गुणमणि विभूषित आदिनाथ के
भारत और बाहुबली ॥
जयति जय ००
वृषभेश जब तप वन चले तब
न्याय नीति कर गए ।
साकेतनगरीपति भरत,
पोदनपुरी बाहुबली ॥
जयति जय००
षटखंड जीता भरत मन की
नहीं आशा बुझी ।
निज चक्ररत्न चला दिया फिर भी
विजयी बाहुबली ॥
जयति जय००
सब आखिर राज्य विभव तजा,
कैलाश पर जा बसे ।
इक वर्ष का ले योग तब,
निश्चल हुए बाहुबली ॥
जयति जय००
तन से प्रभु निर्मम हुए
वन जंतु क्रीडा कर रहे ।
सिद्धि रमा वरने चले
प्रभु वीर बन बाहुबलि॥
जयति जय००
प्रभु बाहुबली की नग्न मुद्रा
सीख यह सिखला रही ।
सब त्याग करके माधुरी
तुम भी बनो बाहुबली ॥
जयति जय००