Aarti Sangrah
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पारसनाथ जी बडागांव

ओं जय पारस देवा,

स्वामी जय पारस देवा |
आरति हम सब करते,

मिले मुक्ति मेवा || टेक ||

बड़ागांव टीले से,

स्वप्न दिया तुमने |
चमत्कार कर प्रगटे,

शरण लही हमने || ओं ..

लक्ष्मण बचे तोप से,

महिमा जग छायी |
तन निरोग कितनों ने,

नेत्र ज्योति पायी || ओं ..

स्याद्वाद गुरुकुल में,

इन्द्र शीश राजे |
शतक आठ फण छाया,

सौम्य मूर्ति साजे || ओं ..

जो भी शरण में आते,

वांछित फल पाते |
भूत-प्रेत, करमों-कृत,

संकट कट जाते || ओं ..

स्याद्वाद ध्वज धरती पर,

आपहि फहराया |
किया समर्पण सन्मति,

अनुभव लहराया || ओं ..