सांसो की टुटी माला अपने हुए पराये
गुरुदेव के वचन तब रह - २ के याद आये
कुछ पुण्य के उदय से नरतन मुझे मिला था
तरने को पार भव से ये ही तो सिलसिला था
जैसे रतन को पाकर-२ सागर में डाल आये
गुरुदेव.................
हर जीव के भ्रमण की लम्बी है एक कहानी
जायेंगे एक दिन सब राजा हो या भिखारी
आये विदा की बेला-२ कोई न रोक पाये
गुरुदेव.............
जाता है वक्त मानों, यामें सफर तू करले
बहती है ज्ञान गंगा गागर तू अपनी भर ले
बीता हुआ समय ये फिर लौट कर न आये
गुरुदेव..................