Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

38.सांसो की टुटी माला अपने हुए पराये

सांसो की टुटी माला अपने हुए पराये 

गुरुदेव के वचन तब रह - २ के याद आये

कुछ पुण्य के उदय से नरतन मुझे मिला था 

तरने को पार भव से ये ही तो सिलसिला था

 जैसे रतन को पाकर-२ सागर में डाल आये 

गुरुदेव.................

हर जीव के भ्रमण की लम्बी है एक कहानी 

जायेंगे एक दिन सब राजा हो या भिखारी 

आये विदा की बेला-२ कोई न रोक पाये 

गुरुदेव.............

जाता है वक्त मानों, यामें सफर तू करले 

बहती है ज्ञान गंगा गागर तू अपनी भर ले

 बीता हुआ समय ये फिर लौट कर न आये

गुरुदेव..................