पीछी रे पीछी इतना बता तूने कौन सा काम किया है
गुरुवर ने खुश होकर के हाथों में थाम लिया है
तेरी किस्मत सबसे अच्छी गुरुवर ने अपनाया
गुरुवर तुझसे प्यार करे क्यों, कोई जान न पाया
गुरुवर की कृपा होने से जग में नाम किया है
गुरुवर ने.............
मोर पंख से बनी है पीछी, सुन्दरता दर्शाती
अपने कोमल पंखो से जीवों के प्राण बचाती
पीछी और कमण्डल का कैसा संजोग मिला है
गुरुवर ने...............
जैसे अपनाया पीछी को मुझको ही अपना लो
मुझको अपनी पीछी समझकर अपने गले लगालो
तेरा मेरा का भेद अनोखा, पीछी से जान लिया
गुरुवर ने..............