बड़ा दुःख पाया गुरुमाँ चरणों को छोड़ के
रो रोके बुलावे बेटा आओ गुरुमाँ दौड़ के
भूल को मेरी गुरुमाँ माफ कर देवों ना - २
हालत बुरी है मेरी, दया कर देवों ना - २
और न सताओं अपने मुखड़े को मोड़ के रो रो.
मुझे न पता था कभी ऐसा दुख पाऊँगा - २
तुझको भुलाकर दर दर ठोकरे खाऊँगा
चरणो में बैठा गुरुजी, मेरे हाथों को जोड के रो-रो..
साथी भी झूठे सारे धोखा मै खाया हूँ
तुझको भुलाके गुरुमाँ चैन एक पल न पाया हूँ
आँखे खुली अब मोरी सबको टटोल के । रो-रो..
गुरु और शिष्य का रिश्ता अनोखा
बाकी तो जग है सारा धोखा ही धोखा
पानी पिला दो गुरुमां ज्ञेय श्री बोल के । रो-रो..