Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

41.बड़ा दुःख पाया गुरुमाँ चरणों को छोड़ के

बड़ा दुःख पाया गुरुमाँ चरणों को छोड़ के

 रो रोके बुलावे बेटा आओ गुरुमाँ दौड़ के

भूल को मेरी गुरुमाँ माफ कर देवों ना - २

हालत बुरी है मेरी, दया कर देवों ना - २ 

और न सताओं अपने मुखड़े को मोड़ के रो रो.

मुझे न पता था कभी ऐसा दुख पाऊँगा - २ 

तुझको भुलाकर दर दर ठोकरे खाऊँगा

चरणो में बैठा गुरुजी, मेरे हाथों को जोड के रो-रो..

 साथी भी झूठे सारे धोखा मै खाया हूँ

तुझको भुलाके गुरुमाँ चैन एक पल न पाया हूँ

आँखे खुली अब मोरी सबको टटोल के । रो-रो..

गुरु और शिष्य का रिश्ता अनोखा

बाकी तो जग है सारा धोखा ही धोखा

पानी पिला दो गुरुमां ज्ञेय श्री बोल के । रो-रो..