Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

48.चरणों में तेरे आके

चरणों में तेरे आके ,
बैठी हूं मैं सर झुकाके
अर्जी सुनो हमारी
ओ मां मेरी जिनवाणी .........
चरणों में तेरे आके..........
जिनवाणी रस से भरी है
वो जिनवाणी माता
विद्या की देवी है तू मां ,
तूने कर्मों को काटा
ज्ञान दिया है तुमने‌ सबको ,‌
तुम हो भाग्य विधाता
मेरे सांसों की सरगम , करती हूं तुमको ही अर्पण
अर्जी सुनो हमारी ......
ओ मां मेरी जिनवाणी.....