Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

49.स्वर्ग से सुन्दर सपनों से प्यारा हे गुरू माँ तेरा द्वार

भजन - 2
स्वर्ग से सुन्दर सपनों से प्यारा हे गुरू माँ तेरा द्वार
बना रहे आशीष आपका आए तुम्हारे द्वार
गुरु मां का द्वार ना छूटे चरण की छांव ना छूटे
स्वर्ग से सुंदर.......
मात-पिता तुम मेरे सच्चे मित्र हमारे -2
सारी दुनिया छोड़ी आये तुम्हारे द्वारे-2
कहाँ मिलेगी इतनी ममता इतना राज दुलार
गुरु माँ का द्वार न ........
स्वर्ग से सुन्दर.........
भाव से भीगी कलियाँ माँ चरणों में आये
अपना लो या ठुकरा दो शरण
तुम्हारी आते
कहाँ मिलेगा ऐसा वात्सल्य ऐसा आशीर्वाद
गुरू माँ का द्वारा...........
स्वर्ग से सुंदर.............