Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

हैं पांच नाम विख्यात तेरे

तर्ज-तेरे पांच हुए कल्याण......


हैं पांच नाम विख्यात तेरे, महावीर वीर अतिवीर प्रभो। 

सन्मति एवं प्रभु वर्द्धमान, त्रिशलानन्दन महावीर प्रभो।। 


जन्म हुआ कुण्डलपुर नगरी, बहुत रतन वहाँ बरसे थे। 

चैत्रसुदी तेरस थी तिथि, जब पितु सिद्धारथ हरषे थे।। 

बनी रत्नमयी धरती.. ....…......................    ........धरती

 बनी रत्नमयी धरती तब से, हे त्रिशलानन्दन वीर प्रभो।। 

हैं पांच नाम.. ...............................।।1।।


पावापुर से मोक्ष पधारे, जल मंदिर वहां लहराया। 

अपने प्रभु का पाद प्रक्षालन, करना मानो उसने चाहा।

 दीवाली मनी तब से.. ..................….................तब से, 

दीवाली तब से शुरू हुई, हे जगदानन्दन वीर प्रभो।।

 हैं पांच नाम.. ........................…......॥२॥


छब्बीस सौवां जन्ममहोत्सव, सबने मनाया है तेरा। 

तेरे उत्सव से ही "चन्दना", जग में जिनशासन फैला।

 जय जय हो प्रभु तेरी. ....................................तेरी 

जय जय हो तेरी युग-युग तक, हे त्रिशलानन्दन वीर प्रभो।। ॥३॥

 हैं पांच नाम................…........।।3।।।