Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

महावीर की जन्मभूमि का

महावीर की जन्मभूमि का, सब मिल करो विकास। 

कुण्डलपुर के कण-कण में, महावीर का दिव्य प्रकाश ।। 

बोलो रे महावीर की जय, बोलो रे अतिवीर की जय। 

बोलो वीर की जय, वर्द्धमान की जय, सन्मतिवीर की जय।।


सभी सुखों का जल मानो, उस कुण्डलपुर में भरा था। 

सिद्धारथ का राजमहल, उपवन से सदा हरा था। 

देवरचित उस नगरी में, महावीर ने किया निवास।

 कुण्डलपुर के कण-कण में, महावीर का दिव्य प्रकाश।।

 बोलो वीर की जय.. ।।१।।


छब्बिस सदियां बीत गईं, अब पहला अवसर आया।

 छब्बिस सौवां जन्मकल्याणक, सारे जग ने मनाया।। 

उत्सव और महोत्सव से, फैला प्रभु का साम्राज्य।

 कुण्डलपुर के कण-कण में, महावीर का दिव्य प्रकाश। 

बोलो वीर की जय.... ।।२।। 


जन्मोत्सव की अमिट देन, अब जन्मभूमि ने पाई। 

गणिनी ज्ञानमती माता ने, नूतन ज्योति जलाई।। 

अब कुण्डलपुर सज धजकर, “चन्दना" करे नव आश। 

कुण्डलपुर के कण-कण में, महावीर का दिव्य प्रकाश ।। 

बोलो वीर की जय... ।।३।।