Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

माता हो त्रिशला के लाल

माता हो त्रिशला के लाल, वीर यहाँ फिर आओ ना। 

कुण्डलपुरी के युवराज, वीर यहाँ फिर आओ ना।। 

माता के गर्भ आए, सुपने दिखाए- सोलह सुपने दिखाए। 

जन्मे तो इन्द्र आए, उत्सव मनाए  जन्म उत्सव मनाए।।

 सिद्धार्थ राजा के लाल, वीर यहाँ फिर आओ ना।

 कुण्डलपुरी के युवराज, वीर यहाँ फिर आओ ना।।१।।

 धरती पुकारे तुम्हें, हिंसा मिटाओ  वीर हिंसा मिटाओ। 

अपना प्राचीन रूप, फिर से दिखाओ वीर फिर से दिखाओ।। 

चौबीसवें अवतार, वीर यहाँ फिर आओ ना। 

कुण्डलपुरी के युवराज, वीर यहाँ फिर आओ ना।।२।।

विचलित हो राजा प्रजा, तुमको भुलाया  वीर तुमको भुलाया।

 वैभव की होड़ लगा, सब कुछ लुटाया वीर सब कुछ लुटाया।। 


"चन्दना "यह कलियुग का राज, वीर यहाँ फिर आओ ना 

कुण्डलपुरी के युवराज, वीर यहाँ फिर आओ ना।।३।।