Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

जिनवर जिनालय और जिनवाणी ध्याइये,

जिनवर जिनालय और जिनवाणी ध्याइये,
जय जिनेन्द्र बोलिए सर्व सुख पाइए ॥टेक॥
जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र बोलिए ।
जय जिनेन्द्र बोलके भाग्य अपना खोलिए ।

जिनवर जग के पालनहारे वो ही तारणहारे,
जिनके दर्शन करने से ही मन के मिटे अँधियारे ।
पूजा ध्यान कीजिए जिनवर मनाइए,
जय जिनेन्द्र बोलिए सर्व सुख पाइए ॥1॥

नित्य नियम से जाओ जिनालय अरिहंतों को ध्याओ,
चौबीसों भगवान की महिमा, साँचे मन से गाओ ।
सच्ची श्रद्धा से मंत्र नवकार गाइए,
जय जिनेन्द्र बोलिए सर्व सुख पाइए ॥2॥

जिनवाणी में सार छुपा है, जीवन को जीने का,
हमें मिला है पावन अवसर, अमरूत रस पीने का ।
स्वाध्याय करके जीवन सुखमय बनाइये,
जय जिनेन्द्र बोलिए सर्व सुख पाइए ॥3॥