Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये

बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये 

चरणों की रज पाकर तकदीर बदल जाये । टे१।

 

मेरा मन बडा चंचल है कैसे इसे समझाउँ 

प्रतिपल में मचलता है कैसे वश में लाउँ 

मुझे अपनी शरण ले लो जीवन में बदल जायें ॥1॥ 

 

नजरों से गिराना ना चाहे कितनी सजा देना 

मेरी नाव भंवर में है उसे पार लगा देना 

नजरों से जो गिर जाये वो कैसे संभल पाये ॥2॥ 

 

तरी पावन यश गाथा सारा जग गाता है 

प्रभू वाणी पर चलकर निर्वाण को पाता है 

बस ये विश्वास लिए तेरी भक्ति में रम जाएँ ॥3॥ 

 

बस एक तमन्ना है तुम सामने हो मेरे 

बहु आश लिए आया चरणों में प्रभू तेरे 

तुम सामने हो मेरे और प्राण निकल जाए। ॥4॥

 

बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये 

चरणों की रज पाकर तकदीर बदल जाये ।