स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना
स्वामी तेरा गौरव है चित को लुभाना
देखा ना एसा सुहाना सुहाना
स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना
1. ये छवि ये तप त्याग जगत का
भाव जगाता आतमबल का
हरता है नरकों का जाना हो जाना
स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना ।
2. जो पथ तुने है अपनाया
वे मन मेरे भी अतिभाया
पाउँ मैं तुम पद लुभाना लुभाना
स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना
3. पंचम गति का मैं वर चाहूँ
जीवन का सौभाग्य दिपाउँ
गूजे है अंतर तराना तराना
स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना ।