Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना

स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना 

स्वामी तेरा गौरव है चित को लुभाना 

देखा ना एसा सुहाना सुहाना  

स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना 

1. ये छवि ये तप त्याग जगत का 

भाव जगाता आतमबल का 

हरता है नरकों का जाना हो जाना 

स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना । 

 

2. जो पथ तुने है अपनाया 

वे मन मेरे भी अतिभाया 

पाउँ मैं तुम पद लुभाना लुभाना 

स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना

 

3. पंचम गति का मैं वर चाहूँ 

जीवन का सौभाग्य दिपाउँ 

गूजे है अंतर तराना तराना 

स्वामी तेरा मुखडा है मन को लुभाना ।