Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

मोक्ष के प्रेमी हमने कर्मो से लडते देखे

मोक्ष के प्रेमी हमने कर्मो से लडते देखे।
मखमल पर सोने वाले धरती पर पढते देखे।

1 सरसों का दाना जिनको, बिस्तर पर चुभता था
काया की सुध छोडी, गीदड़ तन भगते देखे
मोक्ष के प्रेमी.....

2.ऐसे थे पार्श्व स्वामी, तदभव से मोक्ष गामी,
कर्मो ने नही छोड़ा, पत्थर तक पड़ते देखे।
मोक्ष के प्रेमी....

3.सेठो में सेठ सुदर्शन, कामी रानी का बंधन,
शील को नही छोड़ा, सुली पे चढ़ते देखे।
मोक्ष के प्रेमी.....

4.ऐसे निकलंक स्वामी, अध्यन करने की ठानी
, जिन शासन नही छोड़ा, मस्तक तक कटते देखे।
मोक्ष के प्रेमी.....

5.भोगो को अब ताके त्यागो, जागो चेतन अब जागो,
आशा न पुरी होती, मरघट तक जाते देखे।
मोक्ष के प्रेमी.....

6.अर्जुन और भीम जिनके, बल का तो पार न था
आत्म उन्नति के कारण, अग्नि में जलते देखे।
मोक्ष के प्रेमी.....