तर्ज- जहा डाल डाल पर सोने की चिडिया
श्री महावीर के समवशरण में ,
जागे ज्ञान के उजेरा , है वंदन प्रभु को मेरा
1.जिन की वाणी सुन सुरनर प्रभु ,सब सम्यक दर्श पाते ,
जिनके चरणों में आकर के , भवभव के दुख कट जाते ।
ऐसे अरिहंत प्रभु के गुण , नित गाये यह मन मेरा
हैं वंदन ....
श्री महावीर .....
2.जिनका तरण मान स्तम्यदम्भ , सब गोतम का गल जाये
जिनके पग तल में सुरगज सब , पग पग कमल रचाये ।
श्री वीतराग सर्वज्ञ प्रभु ने , शिखर पे डाला डेरा ।
है वंदन.....
3.जहाँ आकर के जन्म मरण की मिटती , अला विपदाये सारी ,
जहा कमलासन पर , अन्तर मन शोभा पाती
उनके चरणों में नमन भक्त , यह करता सुबह सवेरा ,
है वंदन प्रभु ....