Bhajan Sangrah

Bhajan Sangrah

तुने आंगन नहीं बुहारा

तुने आंगन नहीं बुहारा , कैसे आयेंगे भगवान-2
मन का मैल नही धोया , कैसे आयेंगे भगवान
तूने ..

1.हर कोने में कलमस कषाय की , लगी हुई है ढेरी ,
कही ज्ञान की किरण नही है , हर कोठी अंधेरी ।
आंगन चौक है अंधियारा , कैसे आयेंगे भगवान

2.हृदय तुम्हारा पिघल न पाया , जब देखा दुखियारा
कभी किसी दुखिया के तूने , दिया नही है सहारा ।
सूखी हे करूणा की धारा , कैसे .....

3.अंतर के पट खोल देख ले , ईश्वर पास मिलेगा
हर प्राणी में हे परमेश्वर , का आभास मिलेगा
सच्चे मन से नही पुकारा , कैसे .....

4.निर्मल मन था सो जिननायक , चंदना के घर आयें
चंदा प्रभु प्रगटे पिंडी से , समन्त भद्र ध्याये ।
तुने मन से नही पुकारा , कैसे आयेंगे भगवान

5.लिया नाम जो तुम्हारा मेने , खुशियों के दिन आये ।
अब तो रोज दिवाली जैसे , घर में खुशियां आये ।
अब तो लूंगा नाम तुम्हारा , अब तो आ जाओ भगवन तूने . ....