तर्ज-चल दिया छोड परिवार......
सर्वार्थ के सुत सिद्धार्थ, की ले बारात, चले वैशाली
कुण्डलपुर के नर नारी ।। टेक०।।
इक राजवधू यहाँ आएगी।
नूतन इतिहास बनाएगी।
यह सोच के खुश सिद्धार्थ की माता प्यारी,
कुण्डलपुर के नर नारी ।। १।।
कुण्डलपुर से बारात चली।
वैशाली के प्रांगण पहुँची।।
वहाँ ब्याही चेटक पुत्री राजकुमारी,
कुण्डलपुर के नर नारी ।। २।।
के नृप चेटक की पुत्री त्रिशला।
सिद्धारथ की रानी त्रिशला।।
महावीर को देकर जन्म बनी माँ प्यारी,
कुण्डलपुर के नर नारी ।।३।।
छब्बिस सौ वर्षों की घटना।
सिद्धार्थ पुत्र महावीर बना।।
वह बना विरागी वीर बाल ब्रह्मचारी,
कुण्डलपुर के नर नारी ।। ४।।
तप कर कैवल्य को प्राप्त किया।
पावापुरि से निर्वाण लिया।
"चन्दना” सिद्ध बन गये प्रभू सुखकारी,
कुण्डलपुर के नर नारी ।। ५।।