Bhajan Sangrah
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तेरी महिमा को जब सुना

​तेरी महिमा को जब सुना (भजन)

मुखड़ा:

तेरी महिमा को जब सुना, समता की पावन हो शिला

माँ ज्ञेयश्री माँ, तू हमें तारना

माँ ज्ञेयश्री माँ, तू हमें तारना

अंतरा 1:

मन से तेरे गुरु माँ चरणों को थाम लूँ

छोड़ काम विषयों को तेरा नाम लूँ

रख मुझे चरणों तले पूजा करूँ तेरी

तू ही है रब तुझसे अब ज़िन्दगी मेरी

मैं तो पाऊँ चरणों की रज को यूँ सदा

(दोहराव): तेरी महिमा को जब सुना...

अंतरा 2:

बनके तेरा बालक दुनिया को जीत लूँ

बनके तेरा माँ मैं कर्मों को जीत लूँ

मेरे में जो कुछ भी है तू ही है वजह

रखो मुझे पास तेरे यही मेरी जगह

मैं तो पाऊँ चरणों की रज को यूँ सदा

(दोहराव): तेरी महिमा को जब सुना...

अंतरा 3:

छूटे ना ये रिश्ता श्रद्धा का मेरी माँ

मेरे मन के भावों में तू ही मेरी माँ

भूलूँ नहीं मैं कभी दरश को यह

जाऊं नहीं दूर कभी पल भी इक यहाँ

मैं तो पाऊँ चरणों की रज को यूँ सदा

(समापन):

तेरी महिमा को जब सुना, समता की पावन हो शिला

  • माँ ज्ञेयश्री माँ, तू हमें तारना..

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