पात्रों का परिचय
तर्ज - (सुनो जी दुल्हन ... ... (हम साथ-साथ है)
सुनो जी सभी सब गौर से सुनोजी । 2
सब्जी मंडी से तो मिलो जी।।
भिण्डी स्वयंवर की है बात ।
कैसे हुआ वैराग्य है आज।।
नाम पत्रों के बताना है
(1) सभी सदन अब दिल थामो जी,
अब आते हैं आलू सिंह जी
सब जन खाते, सुबह और शाम,
है मुस्कान ये इनका नाम ||
(2) सब्जी मंडी के महाराजा,
कहते इनको कद्दू राजा ।
भिण्डी को पाना है काम,
मोहित वंसल इनका नामा ||
(3) डायबिटीज का दुश्मन न्यारा,
केरल का वो करेला थारा ।
रोग भगाना जिनका काम,
रौनक है इनका शुभ नामा ||
(4) तर्ज - दीदी तेरी देवर दीवाना...
पालक राजा तुम भी जरा,
विटामिन भरपूर दे जाना ।
गुण इनका गाता ये जमाना,
पालिक मित्तल है नाम इनका माना ||
(5) लल्लन पुर का है शहजादा,
चटनी बनती इसकी ज्यादा ।
लहसुन आया भिण्डी द्वार,
रोल निभाने महक तैयार ||
(6) काला कलूटा बैगन लुटा,
भर्ते ने सबका दिल लूटा ।
भागलपुर के हैं महाराज,
रोल निभाती निशिता आज ||
(7) सब्जी मंडी में इतराये,
भिण्डी को पाने हैं आये ।
भिण्डी के लिए हुआ बदनाम,
अंश गोयल है शुभ नाम ||
(8) स्वागत की अब करो तैयारी,
आयी है मुक्ति की सवारी ।
अंश गोयल को पाने हैं तैयार,
श्रीफल बनी खुशी मित्तल आज ||
(9) सब्जी मंडी की है दुलारी,
भिण्डी है वो राजकुमारी ।
है गीतांशी जिनका नाम,
सुनो सुनाये इनके काम ||
(10) तर्ज :- चंदा मामा से भी प्यारे ...
सब बच्चों को एक सूत्र मे "इंदु" पिरोये माला । आखिर भिण्डी का तो स्वयंवर मेंने रख ही डाला !!
भिण्डी का स्वयंबर
हाथ हिलाते अभिवादन करते हुए सभा में आना और कहना -
भिंडी-
शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है। इसिलिए मम्मी ने मेरी यह स्वयंबर रचाया है।।
भिण्डी - मैं हूँ सब्जी देश की राजकुमारी,
कहती हूँ मैं आपसे
पतली दुबली लगती हूँ,
चलती हूँ मैं शान से,
ढूँढ रही हूँ अपने लिए
एक अच्छा सा वर
जो हो अच्छा प्यारा,
जिसमे दो गुण अति सुन्दर,
आओ - आओ
मेरी सभा में आओ,
तुम सब लाओ अपने गुण,
वो देख परख बतलाऊँगी
किसमे है कितना दमखम,
जो मुझसे भा जायेगा,
व्याह कर वो ले जायेगा।।
(1) सबसे पहले पधार रहे हैं ,
अलवरपुर के महाराजा आलू सिंह जी
तर्ज - आओ दिखाएँ तुम्हें अण्डे का फण्डा
आलू - आओ दिखाएँ तुम्हें आलू का फण्डा 2,
मैं नहीं प्यारो कोई मामूली बन्दा 2,
मुझमे बसा है स्टार्च बहुत ज्यादा 2
आओ दिखाएँ तुम्हें आलू का फण्डा,
मैं नहीं प्यारो कोई मामूली बन्दा
तर्ज - उड़े जब जब जुल्फे
भिण्डी - तु हैं जीवों का खजाना आलू 2
कि तुझको त्याग दिया रे आ जीवन
तु तो जीवों का खजाना
आलू कि इस संग पाप लागे
नहीं जाऊँ रे र्ओऽऽऽ
र्ओऽऽऽ जो भी प्राणी आलू खाये
ओऽऽ जो भी प्राणी आलू खाये
कि भालू बन जाये, नहीं जाऊँ रे ओऽऽऽ
(2) अब आलू सिंह जी के बाद पालनपुर के महाराजा पालक सिंहजी पधार रहे है -
तर्ज (मेरा नाम चिन चिन -- = --)
पालक - मेरा नाम पालक है, पालक है, बाना पालक है 2
आयरन शक्ति से भरपूर, सारे जग में मैं मशहूर 2 वाह-वाह-वाह -- ..
भिण्डी - तर्ज - दिल मिल प्यार प्यार --
आयरन - वायरन शक्ति - बक्ति
मैं क्या जानूँ रे, मैं क्या जानूँ रे
जानूँ तो जानूँ 2 कि मैं तुझे पत्ती मानूँ रे।
आयरन - वायरन शक्ति बक्ति मैं क्या जानूँ रे चातुर्मास के चार महीने पत्ती त्यागूँ रे।
(2) (3) अब पधार रहे हैं केरलपुर के राजा करेलासिंहजी -- करेला - तर्ज - सितारों की महफिल में गूंजा है तराना -- (कहोनी प्यार है) भिण्डी की महफिल मे आया है करेला जोगुणो मे सबसे अल्बेला करेला रोगों को भगाता, ब्लड साफ करता, शुगर मेन्टेन करता मंजिल तुमको है पाना , तुम हो भिण्डी मेरी जाने जाना
भिण्डी:- तर्ज - (जा रे जा ओ बजाई ----- ) जा रे जा ओ करेला, कैसा है तू कसैला। तुझसे करूँ ना शादी, चाहे मर जाऊँ कुँवारी ॥ जा रे जा ओ करेला, कैसा है तू बासेला। तू तो है तीखा करेला, ऊपर से नीम चढ़ेला तुझसे करूँ ना शादी, चाहे मर जाऊँ कुँवारी । जा रे जा ओ करेला, कैसा है तू बासेला
(4) अब आपके सामने पधार रहे हैं भागलपुर के महाराज बैंगन राजा बैंगन - तर्ज - मेहन्दी लगा के रखना - मेहन्दी लगा के रखना, डोली सजा के रखना 2 लेने तुझे ओ भिण्डी आये हैं बैंगन राजा 2 ओ ऽऽऽ -- आयरन का मैं हूँ स्वामी, मिनरल का हूँ खजाना। जो चाहे उसको शक्ति, अपना मुझे बनाना ॥ मेहन्दी लगा के रखना --- भिण्डी - तर्ज - (अरे हट जा अरे हट जा हाँ आंगे से ----- ) अरे हट जा 2 अरे हट जा 2 बैंगन हटजा रे, तुझसे तो शादी ना करूँ रे 2 तुझको तो बाइस अभक्ष्य मे माना। तुझको खाके ना पाप कमाना ॥ अरे इससे 2 तो बैंगन त्यागना रे, तुझसे तो शादी ना करूँ रे 2
(5) अब आपके सामने पधार रहे हैं झुमरी तलैया के महाराजा प्याज राजा -
(5) प्याज - तर्ज - मुन्नी बदनाम हुई --- प्याज बदनाम हुआ, औ भिण्डी तेरे लिए 2 प्याज की बनती फ्राई, सबको भाई, धुम मचायी रे ऽऽऽ मुझमे तो गुण का खजाना भरा 2 गर्मी मे लू को तो कर दूँ विदा 2 गर्मी मे ठंडक देता, स्वाद बढ़ाता ऐसा राजा हूँ ऽऽऽ प्याज बदनाम हुआ भिण्डी - तर्ज - छोटा बच्चा जान के मुझको प्याज से शादी ना करूरी, खूब चलाये रैंड 2 टिपि टिपि टप टप 2 मुझको तो खाकर के प्राणी, नर्को मे जायेरे 2 टिपि टिपि टप टप 2 अरे इसमे तो अनन्तानन्त जीव भरे है, प्याज से शादी -- --
(6) अब आपके सामने पधार रहे हैं लल्लनपुर के राजा लहसुन राजा - लहसुन - तर्ज - (खइके पान बनारस वाला ----- -- ) मै तो लल्लनपुर का राजा, बजाने आया सबका बाजा 2 मै तो दिखता छोटा सा, पर है मुझमे बड़ा कमाल कि मैं हूँ 2 राजा मे महाराज, के मै हूँ ऐसा लहसुन राजा मुझमे गुण है भारी ऽऽऽ सारी दुनिया मुझको खाएँ 2 मेरी लहसुन की चटनी, शाही दावत की शान बढ़ाए 2 मैं सब्जी का स्वाद बढ़ाता, जमाना चावसे मुझको खाता मेरी खुश्बू से 2 आवे बहार -- मै तो ऐसा लहसुन राजा भिण्डी - :- तर्ज - (चला - चला रे ड्राइवर गाड़ी --- ) छोड़ा - छोड़ा रे मैने तो लहसुन छोड़ डाला ! छोटी सी उमर मे ही त्याग डाला !! 2 छोड़ा छोड़ा रे इसमे जीव भरे हैं इतने, जिसकी गिनती ना आवे खाने वाला सड - सड कर, नित्य निगोद मे जावे । तेरी बदबू से तो मुझको चक्कर आवे ! तेरी बदबू से तो मुक्षे उल्टी आये ! छोटी सी उमर मे ही त्याग डाला ॥
(3) अब आपके सामने पधार रहे हैं फेकूढ़ी के कद्दू राजा -- कद्दू - तर्ज :- (आदम डिस्को डांसर --- ) आयम कद्दू मास्टर 3, आयरन मैं खिलाता सेल्त मैं सबकी बनाता, मैं पीला, मैं मोटा 2 मैं सबको हूँ भाता 2, आयम कद्दू मास्टर --- भिण्डी - तर्ज - (कद्दू) कद्दू संग नहीं जाऊंगी, डोली रख दो कहारो 2 साल दो साल नहीं जाऊँगी, डोली रख दो कहारो ॥ इस मोटे के संग नहीं जाऊँगी, डोली रख दो कहारो इस पेंडू के संग नहीं जाऊँगी, डोली रख दो कहारो ।
(यहाँ से भिण्डी हो जाती है उदय) भिण्डी - तर्ज - (ऐ मेरे वतन के लोगो) --- -- ) है भगवान इस सभा मे नही कोई ऐसा, जो मन को मेरे भाए। कोई राजा ऐसा आये, जीवो के प्राण बचाये ॥ आखिर जमीकंद तो बहुत बुरा है, नर्को मे यह पहुँचावे प्याज और लहसुन तो भैया, हमे निगोद की सैर करावें जो करूणा भाव को लावे, संग मुझको रोले जाए कोई राजा ऐसा आये, जीवो के प्राण बचाये ।
(आकाशवाणी - (भिण्डी रानी की सुन करुण कहानी, जिनको भारी है जिनवाणी ऐसे शाश्वत सुख के राजा, मुक्तिपुरी के है महाराजा, कहलाते है श्रीफल राजा, तो श्रीफल राजा पधार रहे हैं --- = (8) श्रीफल - तर्ज - (रामपुर का वासी हूँ मैं --- = -- मुक्तिपुरी का राजा मैं हूँ, श्री फल मेरा नाम। रत्नत्रय की डगर है मेरी, मोक्ष है मेरा धाम ॥ सब जीवो को मोक्ष दिलाना है ये मेरा काम ॥ भव्य जीव हित अपना जो चाहे । गुरु चरणो मे चढ़ा मुसे संयम पावे । तोड़े बंधन ड्ड शाश्वत सुख को पावे । मुक्तिपुर -
(3) भिण्डी - मिल गया, मुसे वो राजा मिल गया, मिल गया 2 ओ मुसे मेरे सपनो का साथी मिल गया 2 (पर्दा गिरना) व श्रीफल व भिण्डी की सगाई पक्की होना और एक महीने बाद दोनों की शादी की तारीख तय होना व दोनों तरफ खुशियो का माहौल छाबانا व नाच-गाण की तैयारी होना पर्दा उठना व भिण्डी के स्वयंबर में नृत्य होना व दूसरी तरफ से श्री फल की बारत आने का दृश्य तोरण पर श्रीफल के आने समय पर गाया जाने वाला गीत भिण्डी की सभामे भिण्डी की सखियों नाच कर खुशियाँ मना रही है तर्ज - (आज मेरे यार की शादी है) आज यहाँ भिण्डी की शादी है, आज यहाँ भिण्डी की शादी है, मेरी राजकुमारी की शादी है, आज यहाँ भिण्डी की शादी है।
हजारो बाराती है, ओऽऽऽ, साथ मे संगी साथी, ओऽऽऽ सब्जी की राजकुमारी ओऽऽ सबका है राजदुलारी ओऽऽ मुक्तिपुर के राजा से भिण्डी की शादी है, आज मेरी भिण्डी की शादी है।
दूसरी तरफ से श्रीफल जी बारात आने का दृश्य व नृत्य तोरण है तर्ज - (राजा की आयेगी बारात ------ ) (1) श्री फल की आयेगी बारात, भिण्डी जायेगी साथ, कि आलू कद्दू नाचेंगे कि करेला पालक नाचेंगे, प्याज लहसुन नाचेंगे, बैंगन, आलू नाचेंगे (2) तेरे द्वारे पे आई बारात, -- \checkmark (विवाह फिल्म का गीत) (3) घोड़ी गया वे, दुल्हा बनगयावे -- \times (विवाह फिल्म का गीत) तोरण का दृश्य, श्रीफल को अचानक मुनि संघ का दर्शन देखकर वैराग्य का हो जाना व तोरण पर ही भिण्डी से वार्ता करना श्रीफल - ऐ क्या बोलती तू, भिण्डी - ऐ क्या मैं बोलू मुक्ति मेयर \uparrow श्रीफल - सुन, मुक्ति मेयर भिण्डी - सुना श्रीफल - आली क्या केकड़ी में, भिण्डी क्या करूँ अरे मैं केकड़ी में श्रीफल - अरे विराग सागर जी के चरणों में दीक्षा लेंगे और क्या भिण्डी - अरे हाँ विराग सागर जी के चरणों में दीक्षा लेंगे और क्या \rightarrow गुरु के चरणों मे दीक्षा लेंगे और क्या मेरा हां! गुरुवर के चरणों में दीक्षा लेंगे।
भिण्डी की विदाई:- तर्ज:- (खुशी-खुशी कर दो विदा --- ) खुशी - खुशी कर दो विदा कि भिण्डी रानी दीक्षा को लेवे, मुक्ति का राजा मिला कि भिण्डी रानी मुक्ति पथ चले। भिण्डी का विदा लेते समय सम्बोधन - तर्ज - (झूठ बोले कउवा काटे --- ) भिण्डी :- अरे आलू रूठे, करेला रूठे, रूठे कद्दू और पालक अरे प्याज रूठे, बैगन रूठे, रूठे कद्दू और लहसुन मैं दीक्षा लेने जाऊँगी तुम देखते रहना 2
सभी सखियाँ :- हम दीक्षा लेने जाओगी, हम पीछे-2 आयेगे 2 तुम आर्यिका बन जाओगी, हम भी मुनिवर बन जायेगे। श्रीफल :- छोडो अब तकरार भैय्या, सबको दीक्षा है लेना। हम दीक्षा लेने जायेंगे, तुम देखते रहना। हम दीक्षा लेने जायेंगे, तुम देखते रहना ॥
(जीवन के किसी भीपल में वैराग्य उपज सकता है संसार मे रहकर प्राणी, संसार को तज सकता है)
\rightarrow जय जिनेंद्र \leftarrow
अब सुकृति राय को अपना नृत्य लेकर आ रही है गोंगेयस बालू जी के
(1) आलू - मुस्कान, मोक्षा (2) प्याज - अंश (3) भिण्डी - अनहा
भिण्डी का स्वयंवर
पात्रों का परिचय
तर्ज: (सुनो जी दुल्हन...)
सुनोजी सभी सब गौर से सुनोजी। सब्जी मंडी से तो मिलो जी भिण्डी स्वयंवर की है बात कैसे हुआ वैराग्य है आज
आलू सिंह: सभी सदन अब दिल thamo जी, अब आते हैं आलू सिंह जी। सब जन खाते, सुबह और शाम, है मुस्कान ये इनका नाम।
कद्दू राजा (मोक्ष बंसल): सब्जी मंडी के महाराजा, कहते इनको कद्दू राजा। भिण्डी को पाना है काम, मोक्ष बंसल इनका नामा।
करेला (रौनक): डायबिटीज का दुश्मन न्यारा, केरल का वो करेला थारा। रोग भगाना जिनका काम, रौनक है इनका शुभ नामा।
पालक राजा (पाक्षिक मित्तल):
तर्ज: तेरी मेरी प्रेम कहानी... पालक राजा तुम भी जय आना, विटामिन भरपूर दे जाना। गुण इनकाः सादा जमाना, पाक्षिक मित्तल है नाम इनका माना।
लहसुन (महेक): लल्लन पुर का है शहजादा, चटनी बनती इसकी ज्यादा। लहसुन आया भिण्डी द्वार, रोल निभाने महक तैयार।
बैगन (निश्चित): काला कलूटा बैगन लुटा, भर्ते ने सबका दिल लूटा। भागलपुर कहते मधराज, रोल निभाती निश्चित आज।
अंश गोयल: सब्जी मंडी में इतराये, भिण्डी को पाने हैं आये। भिण्डी के लिए हुआ बदनाम, अंश गोयल है शुभ नाम।
श्रीफल (खुशी मित्तल): स्वागत की अब करो तैयारी, आती है मुक्ति की सवारी। मोक्ष को पाने हैं तैयार, श्रीफल बनी खुशी मित्तल आज।
भिण्डी (गीतांशी): सब्जी मंडी की है दुलारी, भिण्डी है वो राजकुमारी। है गीतांशी जिनका नाम, सुनो सुनाये इनके काम।
इंदु:
तर्ज: चंदा मामा से भी प्यारे... सब बच्चों को एक सूत्र मे "इंदु" पिरोये माला। आखिर भिण्डी का तो स्वयंवर मैंने रख ही डाला !!
नाटक आरंभ
(हाथ हिलाते अभिवादन करते हुए सभा में आना और कहना) भिण्डी: शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है। इसलिए मम्मी ने मेरी यह स्वयंबर रचाया है। मैं हूँ सब्जी देश की राजकुमारी, दिखती हूँ मैं आपसे पतली दुबली लगती हूँ, चलती हूँ मैं शान से, ढूँढ रही हूँ अपने लिए एक अच्छा सावर जो हो अच्छा प्यारा, जिसमे हो गुण अति सुन्दर, आओ - आओ मेरी सभा में आओ, तुम सब लाओ अपने गुण, वो देख परख बतलाऊँगी किसमे है कितना दमखम, जो मुझसे भा जायेगा, व्याह कर वो ले जायेगा।
1. अलवरपुर के महाराजा आलू सिंह जी का प्रवेश
तर्ज: आओ दिखाएँ तुम्हें अण्डे का फण्डा
आलू: आओ दिखाएँ तुम्हें आलू का फण्डा 2, मैं नहीं प्यारो कोई मामूली बन्दा 2, मुझमे बसा है स्टार्च बहुत ज्यादा 2 आओ दिखाएँ तुम्हें आलू का फण्डा, मैं नहीं प्यारो कोई मामूली बन्दा।
भिण्डी:
तर्ज: उड़े जब जब जुल्फे तुले जीवों का खजाना आलू 2 कि तुझ से त्याग दिया रे आजीवन तुले जीवों का खजाना आलू कि तुझ संग पाकलागे नहीं जाऊँ रे ओऽऽऽ ओऽऽऽ जो भी प्राणी आलू खाये ओऽऽ जो भी प्राणी आलू खाये कि भालू बन जाये नहीं जाऊँ रे ओऽऽऽ होऽहो..
2. पालनपुर के महाराजा पालक सिंहजी का प्रवेश
पालक:
तर्ज: मेरा नाम चिनचिन... मेरा नाम पालक है, पालक है, बाना पालक है 2 आयरन शक्ति से भरपूर, सारे जग में मैं मशहूर 2 वाह-वाह-वाह -- ..
भिण्डी:
तर्ज: दिल मिल प्यार प्यार... आयरन-वायरन शक्ति-बक्ति मैं क्या जानूँ रे, मैं क्या जानूँ रे जानूँ तो जानूँ 2 कि मैं तुझे पत्ती मानूँ रे। आयरन-वायरन शक्ति बक्ति मैं क्या जानूँ रे चातुर्मास के चार महीने पत्ती त्यागूँ रे।
3. केरलपुर के राजा करेलासिंहजी का प्रवेश
करेला:
तर्ज: सितारों की महफिल में गूंजा है तराना (कहो ना प्यार है) भिण्डी की महफिल मे आया है करेला जोगुणो मे सबसे अल्बेला करेला रोगों को भगाता, ब्लड साफ करता, शुगर मेन्टेन करता मंजिल तुमको है पाना, तुम हो भिण्डी मेरी जाने जाना
भिण्डी:
तर्ज: जा रे जा ओ बजाई... जा रे जा ओ करेला, कैसा है तू कसैला। तुझसे करूँ ना शादी, चाहे मर जाऊँ कुँवारी ॥ जा रे जा ओ करेला, कैसा है तू बासेला। तू तो है तीखा करेला, ऊपर से नीम चढ़ेला तुझसे करूँ ना शादी, चाहे मर जाऊँ कुँवारी। जा रे जा ओ करेला, कैसा है तू बासेला
4. भागलपुर के महाराज बैंगन राजा का प्रवेश
बैंगन:
तर्ज: मेहन्दी लगा के रखना... मेहन्दी लगा के रखना, डोली सजा के रखना 2 लेने तुझे ओ भिण्डी आये हैं बैंगन राजा 2 ओ ऽऽऽ -- आयरन का मैं हूँ स्वामी, मिनरल का हूँ खजाना। जो चाहे उसको शक्ति, अपना मुझे बनाना ॥ मेहन्दी लगा के रखना ---
भिण्डी:
तर्ज: अरे हट जा अरे हट जा हाँ आंगे से... अरे हट जा 2 अरे हट जा 2 बैंगन हटजा रे, तुझसे तो शादी ना करूँ रे 2 तुझको तो बाइस अभक्ष्य मे माना। तुझको खाके ना पाप कमाना ॥ अरे इससे 2 तो बैंगन त्यागना रे, तुझसे तो शादी ना करूँ रे 2
5. फेकूढ़ी के कद्दू राजा का प्रवेश
कद्दू:
तर्ज: आदम डिस्को डांसर... आयम कद्दू मास्टर 3, आयरन मैं खिलाता सेल्त मैं सबकी बनाता, मैं पीला, मैं मोटा 2 मैं सबको हूँ भाता 2, आयम कद्दू मास्टर ---
भिण्डी:
तर्ज: कद्दू कद्दू संग नहीं जाऊंगी, डोली रख दो कहारो 2 साल दो साल नहीं जाऊँगी, डोली रख दो कहारो ॥ इस मोटे के संग नहीं जाऊँगी, डोली रख दो कहारो इस पेंडू के संग नहीं जाऊँगी, डोली रख दो कहारो।
(यहाँ से भिण्डी हो जाती है उदय)
भिण्डी:
तर्ज: ऐ मेरे वतन के लोगो... इस सभा मे नही कोई ऐसा, जो मन को मेरे भाए। कोई राजा ऐसा आये, जीवो के प्राण बचाये ॥ आखिर जमीकंद तो बहुत बुरा है, नर्को मे यह पहुँचावे प्याज और लहसुन तो भैया, हमे निगोद की सैर करावें जो करूणा भाव को लावे, संग मुझको रोले जाए कोई राजा ऐसा आये, जीवो के प्राण बचाये।
6. प्याज राजा का प्रवेश
प्याज:
तर्ज: मुन्नी बदनाम हुई... प्याज बदनाम हुआ, औ भिण्डी तेरे लिए 2 प्याज की बनती फ्राई, सबको भाई, धुम मचायी रे ऽऽऽ मुझमे तो गुण का खजाना भरा 2 गर्मी मे लू को तो कर दूँ विदा 2 गर्मी मे ठंडक देता, स्वाद बढ़ाता ऐसा राजा हूँ ऽऽऽ प्याज बदनाम हुआ
भिण्डी:
तर्ज: छोटा बच्चा जान के मुझको... प्याज से शादी ना करूरी, खूब चलाये रैंड 2 टिपि टिपि टप टप 2 मुझको तो खाकर के प्राणी, नर्को मे जायेरे 2 टिपि टिपि टप टप 2 अरे इसमे तो अनन्तानन्त जीव भरे है, प्याज से शादी -- --
7. लल्लनपुर के राजा लहसुन का प्रवेश
लहसुन:
तर्ज: खइके पान बनारस वाला... मै तो लल्लनपुर का राजा, बजाने आया सबका बाजा 2 मै तो दिखता छोटा सा, पर है मुझमे बड़ा कमाल कि मैं हूँ 2 राजा मे महाराज, के मै हूँ ऐसा लहसुन राजा मुझमे गुण है भारी ऽऽऽ सारी दुनिया मुझको खाएँ 2 मेरी लहसुन की चटनी, शाही दावत की शान बढ़ाए 2 मैं सब्जी का स्वाद बढ़ाता, जमाना चावसे मुझको खाता मेरी खुश्बू से 2 आवे बहार -- मै तो ऐसा लहसुन राजा
भिण्डी:
तर्ज: चला - चला रे ड्राइवर गाड़ी... छोड़ा - छोड़ा रे मैने तो लहसुन छोड़ डाला ! छोटी सी उमर मे ही त्याग डाला !! 2 छोड़ा छोड़ा रे इसमे जीव भरे हैं इतने, जिसकी गिनती ना आवे खाने वाला सड - सड कर, नित्य निगोद मे जावे । तेरी बदबू से तो मुझको चक्कर आवे ! तेरी बदबू से तो मुक्षे उल्टी आये ! छोटी सी उमर मे ही त्याग डाला ॥
8. श्रीफल राजा का आगमन
(आकाशवाणी: भिण्डी रानी की सुन करुण कहानी, जिनको भारी है जिनवाणी ऐसे शाश्वत सुख के राजा, मुक्तिपुरी के है महाराजा, कहलाते हैं श्रीफल राजा, तो श्रीफल राजा पधार रहे हैं)
श्रीफल:
तर्ज: रामपुर का वासी हूँ मैं... मुक्तिपुरी का राजा मैं हूँ, श्री फल मेरा नाम। रत्नत्रय की डगर है मेरी, मोक्ष है मेरा धाम ॥ सब जीवो को मोक्ष दिलाना है ये मेरा काम ॥ भव्य जीव हित अपना जो चाहे । गुरु चरणो मे चढ़ा मुसे संयम पावे । तोड़े बंधन ड्ड शाश्वत सुख को पावे । मुक्तिपुर -
भिण्डी: मिल गया, मुसे वो राजा मिल गया, मिल गया 2 ओ मुसे मेरे सपनो का साथी मिल गया 2
विवाह एवं अंत
(पर्दा गिरना) व श्रीफल व भिण्डी की सगाई पक्की होना और एक महीने बाद दोनों की शादी की तारीख तय होना व दोनों तरफ खुशियो का माहौल छाना व नाच-गाण की तैयारी होना। (पर्दा उठना) व भिण्डी के स्वयंबर में नृत्य होना व दूसरी तरफ से श्री फल की बारात आने का दृश्य।
तोरण पर श्रीफल के आने समय पर गाया जाने वाला गीत भिण्डी की सभा मे भिण्डी की सखियों नाच कर खुशियाँ मना रही है।
तर्ज: आज मेरे यार की शादी है आज यहाँ भिण्डी की शादी है, आज यहाँ भिण्डी की शादी है, मेरी राजकुमारी की शादी है, आज यहाँ भिण्डी की शादी है।
हजारो बाराती है, ओऽऽऽ, साथ मे संगी साथी, ओऽऽऽ सब्जी की राजकुमारी ओऽऽ सबका है राजदुलारी ओऽऽ मुक्तिपुर के राजा से भिण्डी की शादी है, आज मेरी भिण्डी की शादी है।
तर्ज: राजा की आयेगी बारात...
श्री फल की आयेगी बारात, भिण्डी जायेगी साथ, कि आलू कद्दू नाचेंगे कि करेला पालक नाचेंगे, प्याज लहसुन नाचेंगे, बैंगन, आलू नाचेंगे।
तेरे द्वारे पे आई बारात (\checkmark - विवाह फिल्म का गीत)
घोड़ी गया वे, दुल्हा बनगयावे (\times - विवाह फिल्म का गीत)
तोरण का दृश्य
श्रीफल को अचानक मुनि संघ के दर्शन देखकर वैराग्य का हो जाना व तोरण पर ही भिण्डी से वार्ता करना।
श्रीफल: ऐ क्या बोलती तू
भिण्डी: ऐ क्या मैं बोलू (मुक्ति मेयर \uparrow)
श्रीफल: सुन, मुक्ति मेयर
भिण्डी: सुना
श्रीफल: आली क्या केकड़ी में
भिण्डी: क्या करूँ अरे मैं केकड़ी में
श्रीफल: अरे विराग सागर जी के चरणों में दीक्षा लेंगे और क्या
भिण्डी: अरे हाँ विराग सागर जी के चरणों में दीक्षा लेंगे और क्या
\rightarrow गुरु के चरणों मे दीक्षा लेंगे और क्या मेरा हाँ! गुरुवर के चरणों में दीक्षा लेंगे।
भिण्डी की विदाई
तर्ज: खुशी-खुशी कर दो विदा...
खुशी: खुशी कर दो विदा कि भिण्डी रानी दीक्षा को लेवे, मुक्ति का राजा मिला कि भिण्डी रानी मुक्ति पथ चले।
भिण्डी का विदा लेते समय सम्बोधन:
तर्ज: झूठ बोले कउवा काटे... अरे आलू रूठे, करेला रूठे, रूठे कद्दू और पालक अरे प्याज रूठे, बैगन रूठे, रूठे कद्दू और लहसुन मैं दीक्षा लेने जाऊँगी तुम देखते रहना 2
सभी सखियाँ: हम दीक्षा लेने जाओगी, हम पीछे-2 आयेगे 2 तुम आर्यिका बन जाओगी, हम भी मुनिवर बन जायेगे।
श्रीफल: छोड़ो अब तकरार भैय्या, सबको दीक्षा है लेना। हम दीक्षा लेने जायेंगे, तुम देखते रहना। हम दीक्षा लेने जायेंगे, तुम देखते रहना ॥
(जीवन के किसी भीपल में वैराग्य उपज सकता है, संसार मे रहकर प्राणी, संसार को तज सकता है)
\rightarrow जय जिनेंद्र \leftarrow
नृत्य प्रस्तुति
अब सुकृति राय अपना नृत्य लेकर आ रही है (गोंगेयस बालू जी के):
आलू: मुस्कान, मोक्षा
प्याज: अंश
भिण्डी: जनहा