Poojan-Abhishek
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Aadinath Bhagwan Argh

Aadinath Bhagwan Argh

शुचि निर्मल नीरं गंध सुअक्षत, पुष्प चरु ले मन हरषाय |

दीप धुप फल अर्घ सु लेकर, नाचत ताल मृदंग बजाय ||

श्री आदिनाथ के चरण कमल पर, बलि-बलि जाऊं मन-वच-काय |

हो करुणानिधि भव दुःख मेटो, या तैं मैं पूजूं प्रभु पाय ||

ॐ ह्रीं श्री आदिनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||